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Tuesday, June 13, 2017

कुछ तुम्हारी , कुछ हमारी-यादें बचपन की

  कुछ कुछ याद है मुझे, कुछ कुछ याद है मुझे,
मेरे बच्चों के बचपन के वो अनमोल पल,
स्कूल की परीक्षा ख़त्म होते ही,
वो बक्सों की तैयारी,
नानी -दादी के घर जाने की जल्दी ,
अटरम पटरम सब अटेची में भरना,
कुछ माँ को बता के कुछ छुपा के!
😊😊😊

क्या मज़ा देता था वो,
रेल की खिड़की वाली सीट के लिए,
भाई बहन से झगड़ना,
आौर हर स्टेशन पर कौतुहल से देखना
खाते पीते मैले होकर नानी घर पहुँचना,
नाना नानी का वह पवित्र प्रेम पा कर,
मन का आनन्द से भर जाना!
😊😊😊

कभी आम तो कभी आईसक्रीम ,
कभी पैसे माँगकर विडियोगेम,
दिनभर की धमाचौकड़ी से माँ का परेशान होना,
अौर माँ की पिटाई से बचने के लिए ,
नाना नानी से लिपट जाना।
और फिर दादी को छुप कर दौड़ाना ,
लाड़ प्यार में यूँ ही गरमियों की छुट्टियों का ख़त्म हो जाना!
😊😊😊

चित्रांगदा शरण
13. 06. 2017
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